राज़दार

कई राज़ दफ़न हैं
मेरे बिस्तर में
करवटों के चलते
इन चादरों की सिलवटों से बेहतर
राज़दार क्या होगा

कई राज़ दफ़न हैं
मेरे तकिए में
नम आंखों के चलते
इन तकियों के गिलाफ़ से बेहतर
राज़दार क्या होगा

कई राज़ दफ़न हैं
मेरे कमरे में
कल की बातों के चलते
इन पत्थर की दीवारों से बेहतर
राज़दार क्या होगा

कई राज़ दफ़न हैं
मेरे दिल में
तुम्हारी यादों के चलते
इन सिले हुए होठों से बेहतर
राज़दार क्या होगा

 © अपूर्वा बोरा

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