अब के जो मिलो

Photo by Jonathan Borba from Pexels
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अब के जो मिलो तो सागर पार मिलना
मिलना फ़िर से बिछड़ने के लिए ही सही
सही और गलत के मैदान के पार मिलना

अब के जो मिलो तो सागर पार मिलना
लगे मीलों का फ़ासला मुश्किल तो कोई नहीं
हो सके तो तुम मुझे मंझधार मिलना

अब के जो मिलो तो सागर पार मिलना
नौका न पार लगा पाये तो पीछे मुड़ना नहीं
हो सके तो डुबकी मार कर मिलना

अब के जो मिलो तो सागर पार मिलना
ग़ुरूर तुम पर यूँ जँचता भी तो नहीं
हो सके तो ये लिबास उतार कर मिलना

अब के जो मिलो तो सागर पार मिलना
शब्दों के सौदागरों से दिल माँगते नहीं
हो सके तो तुम ये बाज़ी हार कर मिलना

अब के जो मिलो तो सागर पार मिलना
जीवन भर का साथ तो मुमकिन नहीं
हो सके तो ये उम्र गुज़ार कर मिलना

अब के जो मिलो तो सागर पार मिलना
कब कैसे कहाँ की अब विडंबना नहीं
हो सके तो एक आख़िरी बार मिलना

अब के जो मिलो तो सागर पार मिलना
मिलना फ़िर से बिछड़ने के लिए ही सही
सही और गलत के मैदान के पार मिलना

© अपूर्वा बोरा​

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