अधूरी

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बहुत कविताएं
मैंने अपनी दोस्ती
की तरह अधूरी
छोड़ दी

नहीं
कोई शिकवा नहीं
कोई रंजिश नहीं
मगर कहने को कुछ
बाकी भी तो नहीं
.
.
कविता
इसलिए अधूरी है
क्योंकि उसका
और मेरा संवाद
यहीं थम गया
अब इससे आगे
उस पर मेरा
कोई ज़ोर नहीं

दोस्ती भी
इसलिए अधूरी है
क्योंकि उनका
और मेरा संवाद
यूँ ही थम गया
अब इससे आगे
उस पर मेरा
कोई ज़ोर नहीं

बहुत कविताएं
मैंने अपनी दोस्ती
की तरह अधूरी
छोड़ दी

नहीं
कोई शिकवा नहीं
कोई रंजिश नहीं
मगर कहने को कुछ
बाकी भी तो नहीं।

© अपूर्वा बोरा​

This Post Has 6 Comments

  1. raju bisht

    Bhot bdia likha hai 😍

  2. Robyn

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    work fellows.

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