अधूरी

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बहुत कविताएं
मैंने अपनी दोस्ती
की तरह अधूरी
छोड़ दी

नहीं
कोई शिकवा नहीं
कोई रंजिश नहीं
मगर कहने को कुछ
बाकी भी तो नहीं
.
.
कविता
इसलिए अधूरी है
क्योंकि उसका
और मेरा संवाद
यहीं थम गया
अब इससे आगे
उस पर मेरा
कोई ज़ोर नहीं
.
.
दोस्ती भी
इसलिए अधूरी है
क्योंकि उनका
और मेरा संवाद
यूँ ही थम गया
अब इससे आगे
उस पर मेरा
कोई ज़ोर नहीं
.
.
बहुत कविताएं
मैंने अपनी दोस्ती
की तरह अधूरी
छोड़ दी

नहीं
कोई शिकवा नहीं
कोई रंजिश नहीं
मगर कहने को कुछ
बाकी भी तो नहीं।

 © अपूर्वा बोरा

This Post Has 4 Comments

  1. Bhot bdia likha hai 😍

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