अगर

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हमारी रातें
अगर
शब्द पर
अक्सर
जाती हैं ठहर

याद आते हैं वो
पल जो बिताए थे
किसी की रेशमी
ज़ुल्फ़ों के साये में
छिपकर

हमारी रातें
अगर
शब्द पर
अक्सर
जाती हैं ठहर

याद आते हैं जो
वायदे किये थे
किसी की कोमल
हथेलियों को
थामकर

हमारी रातें
अगर
शब्द पर
अक्सर
जाती हैं ठहर

याद आते हैं वो
आँसू जो बहाये थे
किसी की नादान
मोहब्बत को
ठुकराकर

हमारी रातें
अगर
शब्द पर
अक्सर
जाती हैं ठहर

याद आते हैं जो
सजदे किये थे
दुआओं में
किसी को
माँगकर

हमारी रातें
अगर
शब्द पर
अक्सर
जाती हैं ठहर

याद आते हैं वो
साथ निभाने वाले
जो चले गए
हम ही को
भुलाकर

हमारी रातें
अगर
शब्द पर
अक्सर
जाती हैं ठहर

अगर
वो पल
और
वो साथ
नहीं जाता
गुज़र

इसी ख़याल में
हमारी रातें
अगर
शब्द पर
फ़िर गई
ठहर।

© अपूर्वा बोरा​

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