ऐसे भी

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शाम थी कुछ तन्हा
और हम भी बैचैन कुछ कम नहीं
जब उस वक़्त बैठे दोनों साथ
एक मुलाकात ऐसी भी थी।

सूरज था कुछ उदास
और हम भी गमगीन कुछ कम नहीं
जब उस शाम आँखे मिली दोनों की
एक अलविदा ऐसे भी कहा।

झील थी कुछ शांत
और हम भी खामोश कुछ कम नहीं
जब आहिस्ता सफ़र किया साथ
एक सूकून ऐसा भी मिला।

वो था कुछ निडर
और हम भी बेबाक कुछ कम नहीं
जब जज़्बात टकराये उस रात
एक मोहब्बत ऐसी भी थी।

 © अपूर्वा बोरा

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