अपना पराया

पांच साल से दिल्ली में हूँ
मगर आज भी यहाँ के लिए
पराई हूँ मैं
सत्रह साल अल्मोड़ा में बिताए
मगर अब लौटती हूँ तो कहते हैं
दिल्ली से आई हूँ मैं

दिल्ली में छोटे कपड़े पहने
तो कहते हैं बड़े शहर आकर
पंख लग गये
अल्मोड़ा में पहनती हूँ
तो कहते हैं बड़े शहर जाकर
लक्षण बिगड़ गये

दिल्ली में आवाज़ उठाती हूँ
तो कहते हैं ठाकुर लड़की है
कैसी सी होगी
अल्मोड़ा में उठाती हूँ
तो कहते हैं दिल्ली की लड़की है
ऐसी ही होगी

दिल्ली में आज़ाद रहती हूँ
तो कहते हैं घर से 
सीख कर आई होगी
अल्मोड़ा में रहती हूँ
तो कहते हैं दिल्ली 
रह कर आई होगी

कभी अपना कहते हैं
कभी पराया

यहाँ एक बार जो घर से निकला
वो किसी एक जगह का न रह पाया

अजनबी शहर है
या मैं हूँ

गुमनाम शहर है
या मैं हूँ

हैरान शहर हो न हो
मैं ज़रूर हूँ

 © अपूर्वा बोरा

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