औरत

सहेज कर रखना
संभाल कर रखना
औरत की इज़्ज़त सिर्फ़ उसकी नहीं
तुम्हारे घर का गहना भी है
है ना?
या
है क्या?

धीमे से चलना
धीरे से कहना
औरत के हाव-भाव सिर्फ़ उसके नहीं
तुम्हारे घर का आईना भी है
है ना?
या
है क्या?

ढक के रखना
छिपा के रखना
औरत के कपड़ों की डोर सिर्फ़ उससे नहीं
तुम्हारे घर के रिश्तों से भी तो जुड़ी हैं
है ना?
या
है क्या?

इजाज़त न लेना
माफी न माँगना
औरत के शरीर पर हक़ सिर्फ़ उसका हक नहीं
तुम्हारा भी है
है ना?
या
है क्या?

© अपूर्वा बोरा​

This Post Has 2 Comments

  1. Neelima Sharrma

    बहुत सुंदर अभिव्यक्ति

Leave a Reply