बाकी सब ठीक है बस एक तुम्हारा ख़याल कभी कभी से कुछ ज़्यादा बार आधी रात को नींद से जगा देता है और मैं बिस्तर में तलाशने लगती हूँ एक तेज़ी से जैसे मेरी हथेलियों के नीचे से चादर सिमटने पर नज़र आओगे तुम मुझे फ़िर एक बार पहले की तरह

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मैं नदी किनारे टहल रही थी जब एक तरंग सा उत्पन्न हुआ था तू तट पर बंधी थी मेरी नैया और मुझे प्रलोभन दे गया तू।

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प्रकृति मुझे स्मरण कराती है नारी का नारीशक्ति का नारी के गुणों का वह मुझे स्मरण कराती है हमारा

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कुछ यादों का उधार लिए जाती हूँ और बदले में अपने अल्फ़ाज़ों की सौगात दिए जाती हूँ

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तू नहीं तेरा ख़याल सही मेरा मुझमें अब क्या ही बाकी है तू नहीं तो तेरे होने का महज़ एहसास ही काफ़ी है

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क्या बताऊँ कितनी बातें रात के अंधेरे में तकिये तले दबा कर सुबह होते ही सिगरेट के धुंए में उड़ा बैठी?

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तेरी सुगंध चादर से मिटाने लगी हूँ मैं रात को बत्ती बुझाने लगी हूँ तेरी जगह खुद को ही गले लगाने लगी हूँ मैं रात को बत्ती बुझाने लगी हूँ

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कागज़ मेरा और कहानी तेरी वक़्त मेरा और बातें तेरी ख़्वाब मेरा और सूरत तेरी

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तू एक ख़याल से शुरू होता है मेरे मन में फ़िर आंखों में सैलाब बन उतर जाता है होठों तक

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मेरा बचपन एक कहानी ही तो है तस्वीरों में सबूत मिलते हैं और किस्सों में यादें बताया जाता है कि बाबा अक्सर मुझे अपने कंधों पर चढ़ाकर आंगन के चक्कर लगाते थे

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