सीने में अगन श्वास में जलन थमती धड़कन ज़हरीली पवन

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हमारी रातें अगर शब्द पर अक्सर जाती हैं ठहर याद आते हैं वो पल जो बिताए थे किसी की रेशमी ज़ुल्फ़ों के साये में छिपकर

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इतनी देर हुई ख़यालों में गुम हम घर से निकले थे ज़माने से गम के एवज़ में खुशियों का सौदा करने

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ओ रे पुरवा के झोंके तनिक एक बात तो बताता जा जहाँ से तू आया है आज वहाँ की भोर कैसी दिखी थी?

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स्कूल में पढ़ने वाली जिस लड़की को तुम उसकी कुर्ती तंग होने का या स्कर्ट की लंबाई कम होने का या उसके दुप्पटे की उसके वक्षःस्थल को ढकने में नाकामयाबी का अहसास कराते रहोगे वह लड़की इसी सोच व इल्ज़ामों का बोझ लिए बड़ी होती रहेगी

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खुश रहे या बर्बाद रहे हम दुनिया में जहाँ भी रहे तुम्हारी धड़कन में आबाद रहे उदास रहे या मुस्कुराते रहे हम दुनिया में जहाँ भी रहे तुम्हारी सूरत देख इतराते रहे

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किसी शायरी में बांध रही हूँ तुझे तू इतना भी ना हो अधीर चाहे लाख चेहरा छिपा ले मेरी आँखों में बस चुकी है तेरी तस्वीर ऐ राँझे कहाँ भटकता फिरता है यहाँ बैठी है तेरी हीर

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कागज़ की चिट्ठी को पहले प्यार के इज़हार पर नन्हें हाथों में थमाना कागज़ की कश्ती को बारिश के पानी के नन्हें तालाब में तैराना

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कुछ इज़ाज़त ली और कुछ इबादत की मेरे महबूब से मैंने कुछ इस कदर मोहब्बत की

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एक काम करो घड़ी में रात के नौ बजने के बाद कभी गाड़ी में कुछ मील दूर एक लंबी ड्राइव पर निकल कर अपने या किसी नए शहर की उस जगह को तलाशो जहाँ से जगमगाते शहर का नज़ारा दिखे

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