आवाज़

Photo by Filios Sazeides on Unsplash

दिल टूटने पर
आवाज़ नहीं होती
बिखरे हुए जज़्बातों को
समेटते समेटते
बीत जाता है
न जाने कितना वक़्त

और तब
बड़ी आसानी से
कह देते हो कि
इतनी जल्दी
कदम आगे बढ़ा लिए तुमने

हौसला टूटने पर
आवाज़ नहीं होती
ठोकरों से गिरकर उठना
सीखते सीखते
बीत जाता है
न जाने कितना वक़्त

और तब
बड़ी आसानी से
कह देते हो कि
इतनी जल्दी
हिम्मत जुटा ली तुमने

खुद के टूटने पर
आवाज़ नहीं होती
अनजानी राहों पर
भटकते भटकते
बीत जाता है
न जाने कितना वक़्त

और तब
बड़ी आसानी से
कह देते हो कि
इतनी जल्दी
खुद को ढूंढ लिया तुमने

ख़्वाब टूटने पर
आवाज़ नहीं होती
खींचे हुए कदमों को वापस
चलते चलते
बीत जाता है
न जाने कितना वक़्त

और तब
बड़ी आसानी से
कह देते हो कि
इतनी जल्दी
सपनें सच कर लिए तुमने

मैं चाहे एक लड़ाई
अभी भी क्यों न लड़ रही हूँ
बड़ी आसानी से कह दोगे कि
इतनी जल्दी फतह पा ली है तुमने।

 © अपूर्वा बोरा

Leave a Reply