बाकी सब ठीक है

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बाकी सब ठीक है

बस एक तुम्हारा ख़याल
कभी कभी से कुछ ज़्यादा बार
आधी रात को नींद से जगा देता है
और मैं बिस्तर में तलाशने लगती हूँ
एक तेज़ी से जैसे मेरी हथेलियों के
नीचे से चादर सिमटने पर नज़र आओगे
तुम मुझे फ़िर एक बार पहले की तरह

बाकी सब ठीक है

बस एक तुम्हारा ख़्वाब
कभी कभी से कुछ ज़्यादा बार
सवेरे मुझे नींद से जागने नहीं देता है
और मैं उस स्वप्न में खोने लगती हूँ
एक बेसब्री से जैसे मेरे होने का वजूद
तेरे होने से जुड़ा है और मैं जी पाऊंगी
इस कहानी को फ़िर एक बार पहले की तरह

बाकी सब ठीक है

बस एक तुम्हारा नाम
कभी कभी से कुछ ज़्यादा बार
मेरी होठों तक सीमित नहीं रह पाता
और मैं हर दुआ में बुदबुदाने लगती हूँ
एक उम्मीद से जैसे मेरे माँगने पर
पूरी हो जाएगी मेरी मन्नत और तू आएगा
मेरे बुलाने पर फ़िर एक बार पहले की तरह

बाकी सब ठीक है

बस एक तुम्हारी हीर
कभी कभी से कुछ ज़्यादा बार
अपने मजनूँ से वियुक्त रह नहीं पाती
और अपने प्रेम को संजोये रखती है
एक धैर्य से जैसे इतनी मोहब्बत का
हकदार जब लौटेगा तो उस पर लुटायेगी
अपना सर्वस्व फ़िर एक बार पहले की तरह

बाकी सब ठीक है

बस एक तुम्हारा ख़याल
बस एक तुम्हारा ख़्वाब
बस एक तुम्हारा नाम
कभी कभी से कुछ ज़्यादा बार
तुम्हारी हीर को आगे बढ़ने नहीं देता

बाकी सब ठीक है

© अपूर्वा बोरा​

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