बग़ावत

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जंग का महज़ आग़ाज़ हुआ है
इस बग़ावत की उम्र अभी बाक़ी है

ग़ैरों की लड़ाई कौन लड़ेगा
बात तुम तक पहुँचनी बाक़ी है
बदलते हैं प्राथमिकताएं जो
अपनी सहूलियत के अनुसार
उनका भी वक़्त बदलना बाक़ी है
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जंग का महज़ आग़ाज़ हुआ है
इस बग़ावत की उम्र अभी बाक़ी है

किसी और की पैरवी क्यों करोगे
उँगली तुम पर उठना बाक़ी है
जन्म से इतराते फ़िरते हैं जो
विशेषाधिकार की मोहर लिए
उनके भी रूतबे पर आघात बाक़ी है
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जंग का महज़ आग़ाज़ हुआ है
इस बग़ावत की उम्र अभी बाक़ी है

किसकी ख़ातिर आवाज़ उठाओगे
अन्याय तुम पर होना बाक़ी है
अपनी ऊंची इमारतों से जिन्होंने
औरों को सदैव नीचा ही मापा है
उनकी भी बुनियाद हिलना बाक़ी है
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जंग का महज़ आग़ाज़ हुआ है
इस बग़ावत की उम्र अभी बाक़ी है

कितने मुद्दों को नकारते फ़िरोगे
निशाना तुम पर सधना बाक़ी है
समाचार नज़रअंदाज़ करते हैं जो
ये सोचकर कि इससे मुझे क्या
उन्हें मुख्य समाचार बनना बाक़ी है
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जंग का महज़ आग़ाज़ हुआ है
इस बग़ावत की उम्र अभी बाक़ी है

क्या सोच रहे हो?

जैसा चलता आ रहा है
वैसा ही चलता रहेगा?
आज वक़्त तेरे साथ है
कल नहीं होगा तो क्या करेगा?

टूटने नहीं देते हौसले को
हिम्मत उन में बाक़ी है
देख कर अनदेखा नहीं करते जो
देश के बदलते हालात का मंजर
उनके भीतर चिंगारी बाक़ी है
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जंग का महज़ आग़ाज़ हुआ है
इस बग़ावत की उम्र अभी बाक़ी है

उत्पीड़न होता आया है जिनका
उन्हें इंसाफ मिलना बाक़ी है
जो आज़ादी तुम्हें जन्म से मिली
उसका कर्ज़ चुकाना बाक़ी है

दबा देंगे वो उन आवाज़ों को
जिनमें बग़ावत का अंश बाक़ी है
मिटाकर फ़िर लिखा जाएगा
इतिहास उनके दृष्टिकोण से
तभी तो तख़्त पलटना बाक़ी है
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चुन लो अपना पक्ष भी
कि वक़्त अब भी बाक़ी है

जंग का महज़ आग़ाज़ हुआ है
इस बग़ावत की उम्र अभी बाक़ी है

© अपूर्वा बोरा​

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