• Post comments:0 Comments

How to get blood out of sheets? माँ कहा करती थी दाग़ पर थोड़ा सा नमक मलो फ़िर ज़रा देर रगड़ कर ठंडे पानी में भिगा दो कुछ देर यूँ ही रखने से ख़ून पानी में घुल जाएगा चादर से बीती रात का सबब भी धुल जाएगा

Continue Readingदाग़
  • Post comments:0 Comments

झाँकती है आँखों के ज़रिए रूह में जो उससे भीतर का हाल छिपाओगे कैसे? अंधेरी रातों में सितारों का इंतज़ार है जिसे उसे चंद जुगनुओं से बहलाओगे कैसे?

Continue Readingकैसे
  • Post comments:0 Comments

वक़्त के आगे ज़ोर किसी का चलता है क्या हालात बदल जाने से नसीब बदलता है क्या

Continue Readingक्या
  • Post comments:0 Comments

सुबह की ये उदासी आसमान की शून्यता में पसरी पौ फटने से पहले की ख़ामोशी गुनगुनी चाय संग घुलने वाली ये पल दो पल की नाउम्मीदी दिल के कोने भी हैं सवाली जवाबों से भरे जज़्बात से ख़ाली

Continue Readingउदासी
  • Post comments:0 Comments

महबूब न बन सकी तू माहताब हो गई हक़ीक़त न बन सकी तो ख़्वाब हो गई

Continue Readingमाहताब
  • Post comments:0 Comments

हमारी छत से दिखता है एक अमलतास का पेड़ तुम कभी चुन कर लाते थे जिससे पीले फूलों का गजरा आज कई माह बीत गए ये अमलतास का पेड़ अब भी तुम्हें याद करता है सुनहरी बालियां छेड़ती हैं कह कर मुझसे बातें हज़ार क्या वो भी मुझे याद करता है?

Continue Readingक्या वो मुझे याद करता है
  • Post comments:0 Comments

हक़ीक़त ना सही तुम ख़्वाब बन कर मिला करो शब-ए-हिज्र की आह बन कर मिला करो

Continue Readingमिला करो
  • Post comments:0 Comments

तेरी आदतों की आदत हो गई है इन्हें छुड़ाने की तदबीर कोई बताये तुझे बंद आँखों से पढ़ा है मैंने बाहों में बिखरते सिमटते देखा है मैंने तुझे ख़ामोश लम्हों में भी चाहा है मैंने सोते-जागते, उठते-बैठते जाना है मैंने तुझे ही नहीं तेरे ग़म को भी अपनाया है मैंने तन्हाई को भी दहलीज़ से लौटाया है मैंने तुझे भुलाने की कोशिश की कोशिश करता हूँ इन लम्हों को भुलाने की तदबीर कोई बताये

Continue Readingतदबीर
  • Post comments:0 Comments

मुझे आये दिन ऐसे मर्द मिले जो कहते रहे मैं और मर्दों जैसा नहीं मुझसे घबराया न करो मेरी जान ऊँची आवाज़ में बात करता नहीं मुझ पर ऐतबार करो मेरी जान

Continue Readingऐलान
  • Post comments:0 Comments

ये सफ़र की राहें कैसी पा कर तुझे भूल गया तुझे खोने की बेबसी आगे बढ़ता चला गया तू रह गई पीछे कहीं ये सफ़र की राहें भी कैसी जहाँ मैं हूँ अब वहाँ तू नहीं

Continue Readingवो नहीं