चटनी

Photo by Anshu A on Unsplash

रविवार की दोपहर है
मेहमान आते ही होंगे
धनिया पुदीना दाड़िम
हरी मिर्च और नींबू
सवेरे ही आंगन से लगे
खेत से तोड़े जा चुके हैं
बिजली गुल है तो आज
सिलबट्टा काम आएगा
वैसे मिक्सर में बनाई गई
चटनी में वो स्वाद आता नहीं
इसलिए सिलबट्टा हमारे घर में
अभी तक पुरातत्व सामग्री में
शामिल किया जाता नहीं

रविवार की दोपहर है
मेहमानों के आगमन से पहले
कुछ पल चैन की नींद सब के
हिस्से आई सिवाय बुआ के
वो चटनी पीस रही हैं
.
.
चटनी पिस रही है

दिनांक दिसम्बर पन्द्रह है
उपलक्ष्य मेरा जन्मदिन
पिछली रात को छोले
भिगाये जा चुके हैं और
भटूरे का आटा भी सवेरे
ही गूंदा जा चुका है
मौसम सर्द है मग़र चूल्हे
के निरन्तर प्रयोग से रसोई
का जो वर्तमान तापमान है
उस में हीटर की ज़रूरत नहीं
वैसे ठंड हमें न लग जाये
उस ख़ातिर ऐसी ज़रूरतों की
सूचना हम तक पहुंचती भी नहीं

दिनांक दिसम्बर पन्द्रह है
जन्मदिन समारोह से पहले
कुछ पल इत्मिनान सब के
हिस्से आया सिवाय बुआ के
वो चटनी पीस रही हैं
.
.
चटनी पिस रही है

बरसात का मौसम है
चाय के साथ पकौड़ी
खाने की तलब लगी है
आलू प्याज़ बारीक़ काटा
जा चुका है और बेसन की
मात्रा भी माप ली गई है
कड़ाई में तेल गरम हो
चुका है और भगोने में चाय
वैसे पकौड़ियां तल ली गई हैं
मग़र चटनी के बग़ैर स्वाद
फ़ीका ही मालूम पड़ता है
रसोई से विचरते हुए हमारे
नज़दीक आ गई है सुगंध भी

बरसात का मौसम है
चाय की चुस्कियां लेते हुए
कुछ पल की बातें सब के
हिस्से आई सिवाय बुआ के
वो चटनी पीस रही हैं
.
.
चटनी पिस रही है

आज महीनों बाद घर लौटे हैं
खाने की मेज़ पर
सब से मुलाक़ात हो गई
सिवाय बुआ के
वो चटनी पीस रही हैं

© अपूर्वा बोरा​

Leave a Reply