दोष

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स्कूल में पढ़ने
वाली जिस लड़की
को तुम उसकी कुर्ती
तंग होने का या
स्कर्ट की लंबाई कम
होने का या उसके
दुप्पटे की उसके
वक्षःस्थल को ढकने
में नाकामयाबी का
अहसास कराते रहोगे
वह लड़की इसी सोच
व इल्ज़ामों का बोझ
लिए बड़ी होती रहेगी

इसी लड़की के यौवन
की दहलीज़ पर कदम
रखने के दौरान कभी कोई
उसे छेड़ेगा तो इस बात
की ख़बर वह किसी और
को न दे खुद को ही दोषी
ठहराती रहेगी और अपने
अस्त्तिव पर लाज शरम का
पर्दा डाल उस बोझ तले
और बड़ी होती रहेगी

स्कूल में पढ़ने
वाली जिस लड़की
को तुम लड़कों के साथ
मेलजोल बढ़ाने पर
चरित्र में दाग होने का
या उल्टे जवाब देने पर
संस्कारों की कमी का
या उसकी जिद्दी व्यवहार
की बुरी आदत होने का
अहसास कराते रहोगे
वह लड़की इसी सोच
व इल्ज़ामों का बोझ
लिए बड़ी होती रहेगी

इसी लड़की के यौवन
की दहलीज़ पर कदम
रखने के दौरान उसके साथ
कुछ घट जाए तो इस बात
की ख़बर वह किसी और
को न दे खुद को ही दोषी
ठहराती रहेगी और अपने
अस्तित्त्व पर लाज शरम का
पर्दा डाल उस बोझ तले
और बड़ी होती रहेगी

जानते हो असली दोषी कौन है?
तुम, हाँ तुम।

अगर उस वक़्त तुमने उस
लड़की में दोष खोजने के
बजाय उसे जैसी वो है
रहने देते तो शायद वह
लड़की इस भरोसे के साथ
बड़ी होती कि उसके साथ
जो हुआ या होता है या
हो सकता है उसमें दोष था
न उसकी तंग कुर्ती का
न उसकी छोटी स्कर्ट का
न उसके उड़ते दुप्पटे का
न उसकी लड़कों से दोस्ती का
न उसकी तेज़ ज़बान का
न उसकी ज़िद का

शायद दोष था तो बस
उसके लड़की होने का

 © अपूर्वा बोरा

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