ऐलान

मुझे आये दिन ऐसे मर्द मिले जो कहते रहे

मैं और मर्दों जैसा नहीं
मुझसे घबराया न करो मेरी जान
ऊँची आवाज़ में बात करता नहीं
मुझ पर ऐतबार करो मेरी जान

मोहब्बत की वहाँ जगह नहीं
डर जहाँ घर करे मेरी जान
अतीत में भी बसरता नहीं
मैं इन सबसे हूँ परे मेरी जान

ग़ुस्से में आपा खोता नहीं
सन्देह न करो मेरी जान
चरित्र पर उँगली उठाता नहीं
मुझे सब बताया करो मेरी जान

फ़िर एक रोज़ यही मर्द कहते पाये गये

रात गई मग़र बात जाती नहीं
क़िस्सा अधूरा क्यों सुनाया मेरी जान

अरे आवाज़ ही तो ऊँची की
हाथ थोड़े ही उठाया मेरी जान

ये क़सूर मेरे मिज़ाज़ का नहीं
तुमने ही उकसाया मेरी जान

मुझे आये दिन ऐसे मर्द मिले

जो दस्तक देते रहे
कहते रहे बातें यही
जो धीरज दिखाते रहे
और फ़िर अपमान भी
जो लौटकर आते रहे
दोहराते रहे फ़िर वही
जो मोहब्बत की डींगें हाँकते रहे
और न कर सके सम्मान भी

‘मैं और मर्दों जैसा नहीं’ सा ऐलान
मैंने तो तुमसे नहीं माँगा मेरी जान
माँगा कोई जो कहे बस इतना ही
ठीक है कोशिश करूँगा मेरी जान

© अपूर्वा बोरा​

Leave a Reply