हाल ए दिल

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मैंने कई बार
कोशिश की
कि चंद शब्दों में
अपना हाल ए दिल
बयां कर सकूँ
मग़र ये हो न सका
और ये खामोशी
अब सही नहीं जाती।
.
.
मेरा एक काम
कर सकोगे?
.
.
कुछ शब्द
बिखरे पड़े हैं
तेरे घर से मेरे
घर की ओर
जाने वाली
राह पर
उस राह से
जब तू गुज़रे
उन शब्दों को
एक गीत में
पिरो लेना
शायद ये गीत
मेरा हाल ए दिल
बयां कर सके।

 © अपूर्वा बोरा

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