हल्ला बोल

Photo by Marián Šicko from Pexels

ख़्वाहिशें हमारी आँसुओं में बहती हैं
सुनो ग़ौर से ये आँखें क्या कहती है

तुम जितने ख़्वाब उजाड़ोगे
हम उतनी जड़ें फैलाएंगे
तुम पहरे लाख लगाओगे
हम नित नए ख़्वाब सजाएंगे
.
.
जुनून हमारा रगों में दौड़ता है
सुनो ग़ौर से ये लहु क्या कहता है

तुम सीमा तय करते जाओगे
हम लंबी उड़ान सीख जाएंगे
तुम यहाँ पाबंदी लगाओगे
हम आसमान में पर फैलायेंगे
.
.
बग़ावत हमारे सीने में धड़कती है
सुनो ग़ौर से ये धड़कन क्या कहती है

तुम हक़ीक़त से नज़रें चुराओगे
हम आईना तुम्हें दिखायेंगे
तुम शर्म का घूँघट उड़ाओगे
हम चुनरी से परचम लहरायेंगे
.
.
इंसाफ हमारी ज़ुबां पर रहता है
सुनो ग़ौर से ये क्या कहता है

तुम अनसुना करते जाओगे
हम भी बार बार दोहराएंगे
तुम एक आवाज़ दबाओगे
हम हल्ला बोल सुनाएंगे।

© अपूर्वा बोरा​

Leave a Reply