जाना

Photo by Toa Heftiba on Unsplash

चाँद को बादलों में छिपते देखती हूँ
देखती हूँ रात से सुबह का बदलता नज़ारा
तेरे मेरे बीच कई मीलों का फ़ासला है
है फ़िर तन्हाई में अकेले सोना न गवारा
कब तक ये दूरी मुझे इस कदर सताएगी
जाना, अब तो नींद तेरी बाहों में ही आएगी

बादलों को आसमान में छंटते देखती हूँ
देखती हूँ अंधेरे से उजाले में विलीन होता तारा
तेरे मेरे बीच कई बातों का फ़ासला है
है फ़िर तन्हाई में एक फ़ोन का सहारा
कब तक ये दूरी मुझे इस कदर सताएगी
जाना, अब तो नींद तेरी बाहों में ही आएगी

आसमान को रंग बदलते देखती हूँ
देखती हूँ कैसे पंछियों ने एक दूजे को पुकारा
तेरे मेरे बीच कई ख़ामोशियों का फ़ासला है
है फ़िर तन्हाई में तेरे गीतों ने सँवारा
कब तक ये दूरी मुझे इस कदर सताएगी
जाना, अब तो नींद तेरी बाहों में ही आएगी

रंग को साँझ तलक बिखरते देखती हूँ
देखती हूँ सुहाने मौसम का हर इशारा
तेरे मेरे बीच कई जज़्बातों का फ़ासला है
है फ़िर तन्हाई में कैसे वक़्त मैंने गुज़ारा
कब तक ये दूरी मुझे इस कदर सताएगी
जाना, अब तो नींद तेरी बाहों में ही आएगी

साँझ को फ़िर रात बनते देखती हूँ
देखती हूँ कैसे दिन बीतता है हमारा
तेरे मेरे बीच कई उम्रों का फ़ासला है
है फ़िर तन्हाई में इन फ़ासलों को बिसारा
कब तक ये दूरी मुझे इस कदर सतायेगी
जाना, अब तो नींद तेरी बाहों में ही आएगी

हर रात जगकर एक नई सुबह देखती हूँ
देखती हूँ हमारे दिलों का ये अनोखा इज़ारा
चाँद को बादलों में छिपते देखती हूँ
देखती हूँ रात से सुबह का बदलता नज़ारा
तेरे मेरे बीच कई मीलों का फ़ासला है
है फ़िर तन्हाई में अकेले सोना न गवारा

कब तक ये दूरी मुझे इस कदर सताएगी
जाना, अब तो नींद तेरी बाहों में ही आएगी

© अपूर्वा बोरा​

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