जहाँ भी रहे

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खुश रहे या बर्बाद रहे
हम दुनिया में जहाँ भी रहे
तुम्हारी धड़कन में आबाद रहे

उदास रहे या मुस्कुराते रहे
हम दुनिया में जहाँ भी रहे
तुम्हारी सूरत देख इतराते रहे

तन्हा रहे या महफ़िल में रहे
हम दुनिया में जहाँ भी रहे
तुम्हारी आँखों के साहिल में रहे

धूप में तपे या छाँव में रहे
हम दुनिया में जहाँ भी रहे
तुम्हारी यादों के साये में रहे

शराफ़त से रहे या गुनाह कर रहे
हम दुनिया में जहाँ भी रहे
तुम्हारी मोहब्बत की पनाह में रहे

दूर रहे या पास रहे
हम दुनिया में जहाँ रहे
हरदम तुम्हारे साथ रहे

 © अपूर्वा बोरा

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