जतन

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खुलता रहा ज़ख्म आहिस्ता आहिस्ता
मरहम लगाने का जतन न कर सका
सुनता रहा वो ताउम्र औरों की
मग़र आप सुनाने का जतन न कर सका

चलता रहा मुसाफ़िर आहिस्ता आहिस्ता
थम जाने का जतन न कर सका
जूझता रहा वो ताउम्र तन्हाई से
मग़र साथ निभाने का जतन न कर सका

घुटता रहा दम आहिस्ता आहिस्ता
लत छुड़ाने का जतन न कर सका
खाँसता रहा वो ताउम्र धुएँ में
मग़र सिगरेट बुझाने का जतन न कर सका

होता रहा ख़ामोश आहिस्ता आहिस्ता
हाल बताने का जतन न कर सका
डरता रहा वो ताउम्र मोहब्बत से
मग़र दिल लगाने का जतन न कर सका

रिसता रहा तेल आहिस्ता आहिस्ता
बाती भिगाने का जतन न कर सका
कोसता रहा वो ताउम्र अंधेरे को
मग़र दीया जलाने का जतन न कर सका

बदलता रहा वक़्त आहिस्ता आहिस्ता
बदलाव लाने का जतन न कर सका
बुनता रहा वो ताउम्र ख़्वाब कई
मग़र हक़ीकत बनाने का जतन न कर सका

© अपूर्वा बोरा​

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