ज्वालामुखी

Photo by Poppy Thomas Hill from Pexels
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कहानी में जोड़ तलाश रही हो
क्यों कविता में ताल ढूंढ रही हो
ज्वालामुखी हो तुम ख़ुद
क्यों औरों में मशाल ढूंढ रही हो

बदलाव लाना है तो शुरुआत करो
क्यों साथ तलाश रही हो
मार्ग दिखा सकती हो तुम ख़ुद
क्यों ये भेड़चाल चल रही हो

आसान ज़िंदगी किसे मिलती है
क्यों ऐसी डगर तलाश रही हो
सामना कर सकती हो तुम ख़ुद
क्यों फ़िर मुश्किलों से भाग रही हो

वक़्त को वक़्त दे कर तो देखो
क्यों आप ही निष्कर्ष तलाश रही हो
हालात बदल सकती हो तुम ख़ुद
क्यों बिन कोशिश हार मान रही हो

सोच है तो ख़ामोशी नहीं राय चाहिए
क्यों प्रोत्साहन तलाश रही हो
शब्द के तीर चला सकती हो तुम ख़ुद
क्यों उन्हें तरकश में संभाल रही हो

ज्वालामुखी हो तुम ख़ुद
क्यों औरों में मशाल ढूंढ रही हो

© अपूर्वा बोरा​

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