कागज़

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कागज़ की
चिट्ठी को
पहले प्यार के
इज़हार पर
नन्हें हाथों
में थमाना

कागज़ की
कश्ती को
बारिश के
पानी के
नन्हें तालाब
में तैराना

कागज़ के
विमान को
दोस्तों संग
छत पर
नन्हें शिखर
में उड़ाना

कागज़ के
फूलों को
आकार दे
अम्मा के
नन्हें जूड़े
में सजाना

कागज़ के
एक टुकड़े से
जाने कितने
ख़्वाबों को
पंख देना
बचपन की
इन मधुर
स्मृतियों को
अब सम्भाल
कर यूँ ही
रख देना

क्योंकि अब
ना तो पहले
प्यार की पहली
चिट्ठी लिखी
जाती है
ना बारिश में
कश्ती तैराई
जाती है
ना दोस्तों संग
विमान उड़ाया
जाता है
और ना ही
कागज़ का फूल
अम्मा के बालों
में सजाया
जाता है

उस कागज़
के टुकड़े को
अपनी यादों
में ज़िंदा रखना
ठीक वैसे ही
जैसे उस
कागज़ ने
तुम्हारी कल्पना
को रखा था

 © अपूर्वा बोरा

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