ख़ामोश

वो ख़ामोश रही
जब पहली दफ़ा
किसी से इश्क़ हुआ
आशिकी में
दिल को ठेस लगी
वो फ़िर भी
ख़ामोश रही

जब पहली दफ़ा
माहवारी का दर्द उठा
पेट में
गर्म पानी की बोतल रखी
और वो फ़िर भी
ख़ामोश रही

जब पहली दफ़ा
राह में किसी ने छेड़ा
दुनिया में
दोष लगने के डर से ही सही
वो फ़िर एक बार
ख़ामोश रही

जब पहली दफ़ा
किसी ने बिना अनुमति के उसे छुआ
घबराहट में
अपने आप को ही समेटने लगी
और वो फ़िर भी
ख़ामोश रही

जब पहली दफ़ा
#metoo के बारे में पता चला
समाज में
अपनी आवाज़ उठाने लगी
और दोबारा नहीं
वो फ़िर कभी
ख़ामोश रही।

 © अपूर्वा बोरा

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