ख़याल

हफ़्ते बीत जाते हैं इस ख़याल में
कि इतवार को क्या करेंगे

और इतवार बीत जातें हैं इस ख़याल में
कि अगले हफ़्ते क्या करेंगे

दिन बीत जाते हैं इस ख़याल में
कि रात कैसे गुज़ारा करेंगे

और रातें बीत जाती हैं इस ख़याल में
कि अगली रोज़ क्या करेंगे

महीने बीत जाते हैं इस ख़याल में
कि साल ऐसे बिताया करेंगे

और साल बीत जाते हैं इस ख़याल में
कि अगले महीने क्या करेंगे

उम्र बीत जाती है इस ख़याल में
कि ज़िन्दगी ऐसे जिया करेंगे

और ज़िन्दगी बीत जाती हैं इस ख़याल में
कि ताउम्र क्या करेंगे

हफ़्ते बीत जाते हैं
और इतवार भी
दिन कट जाते हैं
और रातें भी
महीनें बीत जाते हैं
और साल भी
उम्र तो कट जाती है

पर दोस्त,
ज़िन्दगी जी नहीं जाती।

 © अपूर्वा बोरा

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