ख़ुद से ज़्यादा

वो मुझे
ख़ुद से ज़्यादा
अच्छा लगता है
आईने में दीदार
करने से बेहतर
उसकी आँखों में
ख़ुद ही उतरना
अच्छा लगता है
मेरी नज़दीकियों से
उसका यूँ मचलना
अच्छा लगता है।

वो मुझे
ख़ुद से ज़्यादा
अच्छा लगता है
तारीफों के पुल
औरों से बेहतर
उसके मुख से
ख़ुद सुन पाना
अच्छा लगता है
मेरी मुस्कुराहट देख
उसका यूँ शर्माना
अच्छा लगता है।

वो मुझे
ख़ुद से ज़्यादा
अच्छा लगता है
उदासी में अक्सर
बातों से बेहतर
उसके कंधे पर
सिर रख रोना
अच्छा लगता है
मेरी बाहों में
उसका यूँ खोना
अच्छा लगता है।

वो मुझे
ख़ुद से ज़्यादा
अच्छा लगता है
अपने रहस्यों को
छिपाने से बेहतर
उसके साथ अपना
सब कुछ बाँटना
अच्छा लगता है
मेरे साधारण चेहरे को
उसका यूँ ताकना
अच्छा लगता है।

वो मुझे
ख़ुद से ज़्यादा
अच्छा लगता है।

© अपूर्वा बोरा​

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