क्या वो मुझे याद करता है?

हमारी छत से दिखता है
एक अमलतास का पेड़
तुम कभी चुन कर लाते थे
जिससे पीले फूलों का गजरा
आज कई माह बीत गए
ये अमलतास का पेड़
अब भी तुम्हें याद करता है
सुनहरी बालियां छेड़ती हैं
कह कर मुझसे बातें हज़ार
क्या वो भी मुझे याद करता है?

सावन की काली घटाएँ
मेरी लटों संग गूँथ गई हैं
बारिशों को आज़ाद करने
मिलने आओ किसी बहाने
आज कई माह बीत गए
ये सावन का महीना
अब भी तुम्हें याद करता है
काली घटायें छेड़ती हैं
कह कर मुझसे बातें हज़ार
क्या वो भी मुझे याद करता है?

अंखियों के कजरे से
स्याही बना ख़त लिखे
चुम्बन की मोहर भेजी
तुम्हारे स्याह होठों तक
आज कई माह बीत गए
ये फैला हुआ काजल
अब भी तुम्हें याद करता है
सूनी आँखें छेड़ती हैं
कह कर मुझसे बातें हज़ार
क्या वो भी मुझे याद करता है?

कबूतरों की गुटरगूँ सुन
खीझ नहीं उठती अब
दाना चुगने आते हैं जोड़े
टीस उठने लगती है तब
आज कई माह बीत गए
ये पंछियों का आशियाना
अब भी तुम्हें याद करता है
इनकी गुटरगूँ छेड़ती हैं
कह कर मुझसे बातें हज़ार
क्या वो भी मुझे याद करता है?

आज कई माह बीत गए
कल आस की पतंग कट गई
ये उलझा हुआ माँझा
अब फ़रियाद करता है
गिरती हुई पतंग छेड़ती है
कह कर मुझसे बातें हज़ार
क्या वो भी मुझे याद करता है?

© अपूर्वा बोरा​

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