क्यों

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गलत तो बहुत कुछ हो रहा है
अखबार पढ़ते हो
तो पता ही होगा
इंटरनेट पर शोध करते हो
तो भी पता ही होगा
कि गलत तो बहुत कुछ हो रहा है

जब इस बात से परिचित हो
फिर क्यों औरों को उनकी लड़ाई लड़ने नहीं देते?
जब इस बात से परिचित हो
फिर क्यों औरों को उनकी आवाज़ उठाने नहीं देते?

तुम्हारे लिए सिर्फ पितृसत्ता की बात करना 
ज़रूरी क्यों है?
तुम्हारे लिए सिर्फ आज़ादी की बात करना 
ज़रूरी क्यों है?
तुम्हारे लिए सिर्फ छोटे कपड़े पहनने की बात करना
ज़रूरी क्यों है?
तुम्हारे लिए सिर्फ़ भेदभाव की बात करना
ज़रूरी क्यों है?
तुम्हारे लिए सिर्फ उत्पीड़न और अत्याचार की बात करना
ज़रूरी क्यों है?

क्यों नहीं तुम समाज की बात करती?
क्यों नहीं तुम देह व्यापार की बात करती?
क्यों नहीं तुम गरीबी की बात करती?
क्यों नहीं तुम पर्यावरण की बात करती?
क्यों नहीं तुम इसके बारे में बात करती?
क्यों नहीं तुम उसके बारे में बात करती?

गलत तो बहुत कुछ हो रहा है
तुम्हारे साथ भी
मेरे साथ भी
तुम्हारी दुनिया में भी
मेरी दुनिया में भी

तुम्हारी और मेरी 
गलत के ख़िलाफ़ लड़ने की वज़ह अलग होंगी
देखने वाली नज़रें भी अलग होंगी
और देखने का नज़रिया भी अलग होगा

एक अकेला अगर सौ लड़ाई लड़ेगा
और अगर सौ लोग सौ अलग लड़ाई लड़ेंगे
तो जीतेगा कौन?
इंसान जीतेगा और जीत जाएगी इंसानियत।

गलत तो बहुत कुछ हो रहा है
फिर क्यों हम सही होने नहीं देते?

क्यों हम औरों को उनकी जंग लड़ने नहीं देते?
आखिर क्यों हम औरों को उनकी आवाज़ उठाने नहीं देते?

 © अपूर्वा बोरा

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