क्यों है

Photo by Polina Sirotina from Pexels
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बार बार लौट कर आती क्यों है
ये उदासी की बदली छाती क्यों है
तेरी बाहों में सिमट कर नींद आ भी जाये
मग़र तेरी ग़ैरमौज़ूदगी में जगाती क्यों है
ये उदासी की बदली छाती क्यों है

खुशियों से फासला बढ़ाती क्यों है
ये ग़म की परछाई साथ निभाती क्यों है
तेरे कांधे पर सिर रख सुकून मिल भी जाये
मग़र तेरी ग़ैरमौज़ूदगी में फ़िराती क्यों है
ये ग़म की परछाई साथ निभाती क्यों है

साँझ ढलने पर शमा बुझाती क्यों है
ये तन्हा सी रात पास बुलाती क्यों है
तेरे गीतों को सुन कर आसरा मिल भी जाये
मग़र तेरी ग़ैरमौज़ूदगी में सताती क्यों है
ये तन्हा सी रात पास बुलाती क्यों है

नज़रें उस के इंतज़ार में बिछाती क्यों है
ये अधूरी सी बात झूठा ख़्वाब दिखाती क्यों है
तेरी सूरत को देख कोई आस जग भी जाये
मग़र तेरी ग़ैरमौज़ूदगी में टूट जाती क्यों है
ये अधूरी सी बात झूठा ख़्वाब दिखाती क्यों है

हैं अलग जिनकी राहें उन्हें मिलाती क्यों है
ये ज़िंदगी मोहब्बत को आज़माती क्यों है
तेरे खयालों में डूब कर कुछ वक्त कट भी जाये
मग़र तेरी ग़ैरमौज़ूदगी हरदम याद दिलाती क्यों है
ये ज़िंदगी मोहब्बत को आज़माती क्यों है

बार बार लौट कर आती क्यों है
ये उदासी की बदली छाती क्यों है

© अपूर्वा बोरा​

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