मैं लिखती बाद में हूँ

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किसी भी कहानी को
जीती पहले हूँ
उसे कहती बाद में हूँ
मैं लिखती बाद में हूँ

किसी भी किरदार से
टकराती पहले हूँ
उसे बुनती बाद में हूँ
मैं लिखती बाद में हूँ

किसी भी किस्से को
सुनती पहले हूँ
उसे दोहराती बाद में हूँ
मैं लिखती बाद में हूँ

किसी भी जज़्बात से
आंखे मिलाती पहले हूँ
उसे शब्दों में उतारती बाद में हूँ
मैं लिखती बाद में हूँ

किसी भी कहानी में
बिखरती पहले हूँ
उसे समेटती बाद में हूँ
मैं लिखती बाद में हूँ

 © अपूर्वा बोरा

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