मजनूं

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गुलाब भी कहते हैं
और काँटों से भी घबराते हैं

ये आजकल के मजनूं हैं
बिना लैला के आशिक कहलाते हैं।

मोहब्बत करने का दावा भी करते हैं
और हक भी जताते हैं

ये आजकल के मजनूं हैं
बिना लैला के आशिक कहलाते हैं।

चांद भी कहते हैं
और दाग से भी पीछा छुड़ाते हैं

ये आजकल के मजनूं हैं
बिना लैला के आशिक कहलाते हैं।

इज़्ज़त करने का दावा भी करते हैं
और ना को हाँ समझ जाते हैं

ये आजकल के मजनूं हैं
बिना लैला के आशिक कहलाते हैं।

लहर भी कहते हैं
और ठहराना भी चाहते हैं

ये आजकल के मजनूं हैं
बिना लैला के आशिक कहलाते हैं।

इंतज़ार करने का दावा भी करते हैं
और भावनाओं से धमकाते हैं

ये आजकल के मजनूं हैं
बिना लैला के आशिक कहलाते हैं।

लैला भी कहते हैं
और पहरा भी लगाते हैं

ये आजकल के मजनूं हैं
बिना लैला के आशिक कहलाते हैं।

ज़बरदस्ती भी करते हैं
और उसे मोहब्बत का नक़ाब पहनाते हैं

ये आजकल के मजनूं हैं
बिना लैला के आशिक कहलाते हैं।

 © अपूर्वा बोरा

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