मेरी जान

क्या जागती हो अब भी रातों में
या करती हो ख़्वाबों में मेरा इंतज़ार
मुझसे फ़ासला बढ़ा कर मेरी जान
किस पर लुटाती हो मेरे हिस्से का प्यार?

क्या रोकती हो आब-ए-चश्म हुज़ूम में
या बिखरती हो तन्हाई में ज़ार ज़ार
मेरी कमी ख़लने पर मेरी जान
किस संग लेती हो रात गुज़ार?

क्या छिपाती हो अब भी किताबों में
या पढ़ती हो सर-ए-बाज़ार
मुझ तक न पहुँचे जो ख़त मेरी जान
किस पते भेजती हो अपने अशआर?

क्या तलाशती हो अब भी ज़माने में
या परखती हो दीवानों की क़तार
मेरी बाहों में जो न मिल सका मेरी जान
कहाँ हासिल होगा तुम्हें दिल का क़रार?

क्या जलती हो आतिश-ए-उल्फ़त में
या करती हो डूबकर दरिया पार
मुझ सा एक दीवाना ढूंढ़ कर मेरी जान
क्या उस पर लुटाती हो मेरे हिस्से का प्यार?

*आब-ए-चश्म – Tears
*सर-ए-बाज़ार – Openly
*अशआर – Couplets/poetry
*क़रार – Peace
*आतिश-ए-उल्फ़त – Fire of love

© अपूर्वा बोरा​

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