मिला करो

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हक़ीक़त ना सही तुम ख़्वाब बन कर मिला करो
शब-ए-हिज्र की आह बन कर मिला करो

नवाज़िश ना सही तुम अज़ाब बन कर मिला करो
भटकते मुसाफ़िर की राह बन कर मिला करो

आब-ए-हयात ना सही तुम शराब बन कर मिला करो
तन्हा रातों में जन्नत-ए-निगाह बन कर मिला करो

चाँद ना सही तुम आफ़ताब बन कर मिला करो
गर्दिश-ए-फ़लक की अफ़वाह बन कर मिला करो

गुलशन ना सही तुम ग़ुलाब बन कर मिला करो
किसी काफ़िर की हमराह बन कर मिला करो

नख़लिस्तान ना सही तुम सराब बन कर मिला करो
दाग़-ए-मोहब्बत की गवाह बन कर मिला करो

ख़लीक़ ना सही तुम ख़राब बन कर मिला करो
ज़ालिम ज़माने से बेपरवाह बन कर मिला करो

हक़ीक़त ना सही तुम ख़्वाब बन कर मिला करो
हिज्र-ज़दा यार की पनाह बन कर मिला करो

Glossary –

*शब-ए-हिज्र – विरह की रात
*नवाज़िश – मेहरबानी
*अज़ाब – यातना
*आब-ए-हयात – अमृत
*जन्नत-ए-निगाह – वो जो आंखों को भली मालूम हो
*आफ़ताब – सूरज
*गर्दिश-ए-फ़लक – आकाश का फेरा
*नख़लिस्तान – मरूस्थल के बीच हरे भरे दरख्तों वाला मैदान (oasis)
*सराब – भ्रम (mirage)
*दाग़-ए-मोहब्बत – वियोग का दुख
*ख़लीक़ – सुशील
*हिज्र-ज़दा – जुदाई का मारा

© अपूर्वा बोरा​

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