मोहब्बत से कतराना

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हम शायद
मोहब्बत से
कतराने लगे हैं
हाल फिलहाल
उनसे दूर
जाने लगे हैं
दिल की ही
बात होती अगर
तो ठीक था
मग़र वो तो
धड़कनों में भी
समाने लगे हैं।
.
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हम शायद
मोहब्बत से
कतराने लगे हैं
वक़्त बेवक़्त
उनके पैगाम
ठुकराने लगे हैं
सामना करने की
ही बात होती अगर
तो ठीक था
मग़र वो तो
ख़यालों में भी
आने लगे हैं।
.
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हम शायद
मोहब्बत से
कतराने लगे हैं
जाने अनजाने
उनसे नज़रें
चुराने लगे हैं
महफ़िल जमाने की
ही बात होती अगर
तो ठीक था
मग़र वो तो
आँखों से भी
जाम पिलाने लगे हैं।
.
.
हम शायद
मोहब्बत से
कतराने लगे हैं
भूले भटके
उनसे हाल ए दिल
छिपाने लगे हैं
दिल देने की
ही बात होती अगर
तो ठीक था
मग़र वो तो
मुझसे मुझे ही
माँगने लगे हैं।

© अपूर्वा बोरा​

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