नारी

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प्रकृति मुझे स्मरण
कराती है
नारी का
नारीशक्ति का
नारी के गुणों का
वह मुझे स्मरण
कराती है
हमारा।

हम उस समाज में रहते हैं
जहां हमें ऐसी प्रशंसा
मिला करती है
सुंदर
आकर्षक
पवित्र
मासूम
कामुक
नाज़ुक

ऐसी प्रशंसा जिसे
हम नग्न आंखों
से भी देख सकते हैं।

कुछ ही हैं जो उन्हें
जिस्मानी सतह से परे
देखने व गहराई मापने
का प्रयत्न करते हैं।

वह एक सुंदर नदी है।
लेकिन उस पर क्यों ठहरें?
देखो कितनी निर्भीक है।
देखो वह कैसे हर सांचे में ढलती
बनती और फ़िर बिख़र जाती है।
वह अजेय है।

वह सुंदर वृक्ष है।
लेकिन उस पर क्यों ठहरें?
देखो वह कितना दयालु है।
देखो यह आंधी तूफ़ान में डटकर
सबको एकसाथ बांधे रखता है।
वह शक्तिशाली है।

वह एक सुंदर पक्षी है।
लेकिन उस पर क्यों ठहरें?
देखो कितना साहसी है।
देखो वह कितनी ऊंची उड़ान भर कर
रोज़ अपनी परीक्षा लेता है।
वह स्वतंत्र है।

वह सुंदर नारी है।
लेकिन उस पर क्यों ठहरें?
वह निर्भीक है।
वह अजेय है।
वह दयालु है।
वह शक्तिशाली है।
वह साहसी है।
वह स्वतंत्र है।

अगली बार जब आप
राह में उससे टकरायें
तो जिस्मानी सतह से
परे देखने व गहराई मापने
का एक प्रयत्न तो करें।

जैसे भोजन में नमक स्वादनुसार
वैसे नारी भी नज़रिया अनुसार
बन सकती है आपकी
महत्वाकांक्षा या विभीषिका।

वह नारी है
और वह आपको प्रकृति का
स्मरण कराएगी
ठीक वैसे ही
जैसे प्रकृति
स्मरण कराती है
आपको उसका।

© अपूर्वा बोरा​

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