ओ मुसाफ़िर

Photo by christian buehner on Unsplash

ओ मुसाफ़िर
तनिक ठहर
तो ज़रा
इस बरगद के
पेड़ के तने से
लग इसकी
छाँव तले
तनिक पसर
तो ज़रा

ओ मुसाफ़िर
तनिक ठहर
तो ज़रा
इस पगडंडी के
दोराहे पर जो
सुनहरी पत्तियां
बिखरी हैं उनसे
तनिक गुज़र
तो ज़रा

ओ मुसाफ़िर
तनिक ठहर
तो ज़रा
इस शाम के
ढलते सूरज
का मंजर
आँखों में
तनिक भर
तो ज़रा

ओ मुसाफ़िर
तनिक ठहर
तो ज़रा
इस अनजाने
सफ़र से लौटकर
अपनी रोज़मर्रा
की ज़िंदगी से
तनिक डर
तो ज़रा

ओ मुसाफ़िर
तनिक ठहर
तो ज़रा
इस लम्हें की
अहमियत और
क्षणभंगुरता
का एहसास
तनिक कर
तो ज़रा

ओ मुसाफ़िर
तनिक ठहर
तो ज़रा।

© अपूर्वा बोरा​

Leave a Reply