ओ पिया

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ओ पिया
किसी रोज़ मुझे देख
बरस कर मेघ की तरह
तुम मेरे ह्रदय की बंजर
जमीं में प्रेम के बीजों को
नीर दे फ़सल बनाना
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ओ पिया
किसी रोज़ मुझे देख
कौंध कर बिजली की तरह
तुम मेरे ह्रदय की स्तब्ध
धड़कन में प्रेम के तार को
छेड़ नींद से जगाना
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ओ पिया
किसी रोज़ मुझे देख
बदल कर ऋतुओं की तरह
तुम मेरे ह्रदय की जुनैद
सतह पर प्रेम के रंग को
छिड़क मौसम बहलाना
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ओ पिया
किसी रोज़ मुझे देख
ढल कर सूरज की तरह
तुम मेरे ह्रदय की अंधेरी
रात में प्रेम के आकाश में
चाँद तारे बन जाना
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ओ पिया
किसी रोज़ मुझे देख
अपने प्रेम को आज़माना
ओ पिया
किसी रोज़ मुझे देख
ख़ुद में ही मिलाना
ओ पिया
किसी रोज़ मुझे देख
मेरे ब्रह्मांड में समाना
ओ पिया
किसी रोज़ मुझे देख
ये सब कर गुज़र जाना।

© अपूर्वा बोरा​

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