साथी

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दिन भर की थकन से चूर
जब घर लौट कर आऊं मैं
तो राहत की एक सांस का
उधार नहीं चाहिए

मेरा वक़्त मेरा हो
उस पर किसी और का
अधिकार नहीं चाहिए

एकांत की परिभाषा
जो समझ सके
ऐसा साथी चाहिए

किताबों में मशगूल
जब हो जाऊं मैं
तो आम सी किसी बातचीत की
दरकार नहीं चाहिए

मेरा शौक मेरा हो
उस पर किसी और का
अधिकार नहीं चाहिए

रुचि की परिभाषा
जो समझ सके
ऐसा साथी चाहिए

आसमान में बिखरे तारों तले
जब एक चम्मच चांदनी चुराऊं मैं
तो असाध्य सपनों को ले कर
तकरार नहीं चाहिए

मेरा ख़्वाब मेरा हो
उस पर किसी और का
अधिकार नहीं चाहिए

उम्मीद की परिभाषा
जो समझ सके
ऐसा साथी चाहिए

नींद के आगोश में
जब डूब जाऊं मैं
तो बिना दस्तक छूने का
करार नहीं चाहिए

मेरा शरीर मेरा हो
उस पर किसी और का
अधिकार नहीं चाहिए

इज़ाज़त की परिभाषा
जो समझ सके
ऐसा साथी चाहिए

 © अपूर्वा बोरा

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