सब कुछ है

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ख़ुद से ही प्रीत निभानी है
आप है तो सब कुछ है
वरना दुनिया तो बेगानी है

सपनों के पीछे दौड़ लगानी है
हौसला है तो सब कुछ है
वरना कैसी ये ज़िंदगानी है

दूर एक नई दुनिया बसानी है
उम्मीद है तो सब कुछ है
वरना हालात से ये जंग पुरानी है

जग में अपनी पहचान बनानी है
लगन है तो सब कुछ है
वरना भीड़ में तो गुमनामी है

समाज की बेड़ियाँ हटानी है
आज़ादी है तो सब कुछ है
वरना उम्र क्या क़ैद में बितानी है

किसी के इश्क़ में लुटानी है
मोहब्बत है तो सब कुछ है
वरना किस काम जवानी है

जज़्बा है जुनून है रवानी है
ज़िन्दगी जी तो सब कुछ है
वरना बेकार ये कहानी है

© अपूर्वा बोरा​

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