सवाल जवाब

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तुमने मेरी कविताएं पढ़ी हैं
मेरी आत्मकथा के अंश नहीं
इन किस्सों में मेरे अतीत के हिस्से
इन किरदारों में लोगों के चेहरे और
इन कहानियों में यथार्थ की झलक
देखने की नाक़ाम कोशिश न करो
सवाल हैं तो पूछने का हौसला रखो
ख़ुद ही जवाब देने हैं तो अलग बात है

मेरा दिन कैसा गुज़रता है से लेकर
मैं रातें किस तरह काटा करती हूँ
इन सब का लेखा जोखा शब्दों में पढ़ो
मग़र वो है आधा सच ये भी जान लो
सवाल हैं तो पूछने का हौसला रखो
ख़ुद ही जवाब देने हैं तो अलग बात है

किसी की बाहों में भुलाती हूँ गम सभी
किसी की यादों में डूब जाती हूँ कभी
इन निजी पलों को दुखती रग समझो
मग़र वो है अधूरी बात ये भी मान लो
सवाल हैं तो पूछने का हौसला रखो
ख़ुद ही जवाब देने हैं तो अलग बात है

कोई पुरानी मोहब्बत की आस होगी
या कोई नये ज़ख़्म की तलाश होगी
इन अधूरी दास्तां को दिल्लगी कहो
मग़र वो है दिल का राज़ ये भी जान लो
सवाल हैं तो पूछने का हौसला रखो
ख़ुद ही जवाब देने हैं तो अलग बात है

किसी मुलाक़ात का ज़िक्र किया होगा
या किसी को फ़िर अलविदा कहा होगा
इस बीते हुए वक़्त का बख़ूबी हिसाब रखो
मग़र वो है लम्हों की बात ये भी मान लो
सवाल हैं तो पूछने का हौसला रखो
ख़ुद ही जवाब देने हैं तो अलग बात है

तुमने मेरी कविताएं पढ़ी हैं
मेरी आत्मकथा के अंश नहीं
इन किस्सों में मेरे अतीत के हिस्से
इन किरदारों में लोगों के चेहरे और
इन कहानियों में यथार्थ तलाशने
की नाक़ाम कोशिश क्यों करते हो?
सवाल हैं तो पूछने का हौसला रखो
ख़ुद ही जवाब देने हैं तो अलग बात है

© अपूर्वा बोरा​

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