शहर

एक छोटा सा शहर है

जहाँ औरों से दूर
खुद को खोजा करती हूँ

ऊंची इमारतों से दूर
पहाड़ों की ओर देखा करती हूँ

हॉर्न के शोर से दूर
पत्तों की सरसराहट सुना करती हूँ

प्रदूषण की धुंध से दूर
बादलों का ताज पहना करती हूँ

लू के थपेड़ों से दूर
हवाओं के आलिंगन में छिपा करती हूँ

आसमान की शून्यता से दूर
तारों की छांव तले सोया करती हूँ

इंसानों के चक्रव्यूह से दूर
वृक्षों की हरियाली में डूबा करती हूँ

एक छोटा सा शहर है

जहाँ औरों से दूर
अक्सर खुद से मिला करती हूँ

 © अपूर्वा बोरा

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