सुनो

Suno

मैं लड़खड़ाती बहुत हूँ, क्या थाम सकोगे मेरा हाथ?
मैं ठहरती नहीं हूँ, क्या चल सकोगे मेरे साथ?

सुनो,

मेरे स्वाभिमान को ठेस न पहुंचाना
इस जीवन में बहुत कुछ सहा है
उनकी क्षतिपूर्ति तुम्हारी ज़िम्मेदारी नहीं
मग़र मेरे अतीत पर सवाल तुम न उठाना

मेरा हाथ थाम सको तभी माँगना मेरा हाथ
ग़र नहीं तो क्यों बेवज़ह दिल लगाना

आग में तपकर ही सोना निखरता है
तो मेरी राह भी आसान नहीं होगी
न लाना सोने के हार का उपहार
चले आना खाली हाथ मेरे दिलदार
बस मुझसे इज़्ज़त से पेश आना
मेरे स्वाभिमान को ठेस न पहुंचाना

मैं लड़खड़ाती बहुत हूँ, क्या थाम सकोगे मेरा हाथ?
मैं ठहरती नहीं हूँ, क्या चल सकोगे मेरे साथ?

सुनो,
मेरी इच्छाओं का गला न घोंटना
इन आँखों ने बड़े ख़्वाब देखें हैं
उन्हें पूरा करना तुम्हारी ज़िम्मेदारी नहीं
मग़र मुझे आगे बढ़ने से तुम न रोकना

मेरे साथ चल सको तभी बनना हमसफ़र
ग़र नहीं तो क्यों बेवज़ह रिश्ता जोड़ना

हीरे को चमकने की इज़ाज़त है
तो मेरे सपनों को भी होगी
न लाना हीरे की अंगूठी का उपहार
चले आना दिल में भरकर प्यार
बस मुझसे किया वादा न तोड़ना
मेरी इच्छाओं का गला न घोंटना

मैं छिपाती बहुत हूँ, क्या जान सकोगे मेरे हालात?
मैं जताती नहीं हूँ, क्या बूझ सकोगे मेरी बात?

सुनो,
मेरी देह पर एकाधिकार न जताना
इसे ग़ैरों की नज़र से बचाकर रखती हूं
उसकी सुरक्षा तुम्हारी ज़िम्मेदारी नहीं
मग़र बिन इज़ाज़त हाथ तुम भी न लगाना

मेरी ना समझ सको तभी कहना हाँ
ग़र नहीं तो क्यों बेवज़ह दिल दुखाना

चांदनी रात में फूलों की सेज सजी हो
तो भी किवाड़ पर दस्तक़ देकर आना
न लाना चाँदी की पायल का उपहार
चले आना अहं का लिबास उतार
बस मुझसे सहमति से रिश्ता निभाना
मेरी देह पर एकाधिकार न जताना

मैं छिपाती बहुत हूँ, क्या जान सकोगे मेरे हालात?
मैं जताती नहीं हूँ, क्या बूझ सकोगे मेरी बात?

सुनो, तभी आना माँगने मेरा हाथ।

© अपूर्वा बोरा​

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