स्वप्न

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मैं स्वप्न में हूँ
मुझे नींद से न जगाओ
इस स्वप्न में मेरा मिर्ज़ा
अपनी साहिबा के आने
की राह ताक कर रहा है
हो सके तो ये रास्ता
उस तक ले जाओ

मैं स्वप्न में हूँ
मुझे नींद से न जगाओ
इस स्वप्न में मेरा मिर्ज़ा
अपनी साहिबा की गोद में
सिर रख सो रहा है
हो सके तो मेरी थपकी
उस तक ले जाओ

मैं स्वप्न में हूँ
मुझे नींद से न जगाओ
इस स्वप्न में मेरा मिर्ज़ा
अपनी साहिबा की बाहें
गले में डाल रहा है
हो सके तो मेरी चाहत
उस तक ले जाओ

मैं स्वप्न में हूँ
मुझे नींद से न जगाओ
इस स्वप्न में मेरा मिर्ज़ा
अपनी साहिबा को एकटक
बस निहार रहा है
हो सके तो मेरे गालों की सुर्ख़ी
उस तक ले जाओ

मैं स्वप्न में हूँ
मुझे नींद से न जगाओ
इस स्वप्न में मेरा मिर्ज़ा
अपनी साहिबा को सब
तरफ़ तलाश रहा है
हो सके तो उसे तुम
मुझ तक ले आओ

मैं स्वप्न में हूँ
मुझे नींद से न जगाओ
जो मैं नींद से जाग गई
तो साहिबा से मिर्ज़ा मिल
नहीं पाएगा इस कहानी में
हो सके तो इस स्वप्न को
टूटने न दे पाओ
मैं स्वप्न में हूँ
मुझे नींद से न जगाओ।v

© अपूर्वा बोरा​

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