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ख़ामोश हो गया है वो जो था मुझे सब कुछ बताने वाला बातें याद रखता था जो अब बन गया है उन्हें भुलाने वाला नाराज़ हो गया है वो जो था हरदम मुझे मनाने वाला बाहों में था जो अब बन गया है यादों में समाने वाला

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रात के अंधेरे में निकली जगमग जुगनुओं की बारात क़सूर था बादलों का जिसने ढाँप लिया पूरा आसमान और हमने बेवज़ह ही चाँद के फ़र्ज़ पर लगा दिया इल्ज़ाम

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सुना है वो ज़माने से हमारी शिकायतें करता फिरता है एक हम हैं जो उसके लबों से अपना ज़िक्र सुन मचल जाते हैं वो गैरों की महफ़िलों में गुज़ारता है आजकल शाम एक हम हैं जो उसके आने की उम्मीद से बहल जाते हैं

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हम नज़रों के खेल को इश्क़ का नाम दे बैठे आपने तो गुज़ारी केवल एक शाम हमारे साथ हम उस शाम के सहारे पूरी ज़िन्दगी बिता बैठे

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