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तुम होते तो अलग बात होती सवेरे की अदरक वाली चाय पर हमारी गुफ़्तगू कमाल होती मैं अपनी कविताएं पढ़ती तो तुम्हारी कहानियां भी साथ होती तुम होते तो अलग बात होती

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हम नज़रों के खेल को इश्क़ का नाम दे बैठे आपने तो गुज़ारी केवल एक शाम हमारे साथ हम उस शाम के सहारे पूरी ज़िन्दगी बिता बैठे

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