• Post comments:0 Comments

उसकी ज़ुल्फ़ सुलझाते सुलझाते मैं ख़ुद उसमें उलझता चला जाता हूँ वो पलट कर देखती है मेरी ओर और मैं उन अदाओं से मचलता चला जाता हूँ

Continue Reading उसकी बातें
  • Post comments:0 Comments

सुनता हूँ जो गीत रातों में मैं धुन सभी उसे भी सुनाना चाहूँ जागा करती है जो तन्हा रातों में उसे अपनी बाहों में सुलाना चाहूँ

Continue Reading चाहूँ
  • Post comments:0 Comments

ख़ामोश हो गया है वो जो था मुझे सब कुछ बताने वाला बातें याद रखता था जो अब बन गया है उन्हें भुलाने वाला नाराज़ हो गया है वो जो था हरदम मुझे मनाने वाला बाहों में था जो अब बन गया है यादों में समाने वाला

Continue Reading वो
  • Post comments:0 Comments

चाँद और वो एक दूजे से इतने भी अलग नहीं हर रात चाँद बदलता है आकार भीतर बदलती रहती है वो भी वो सूर्य की ओट में दमकता है खिलती है तेरी रोशनी में वो भी

Continue Reading चाँद और वो
  • Post comments:0 Comments

सुना है वो ज़माने से हमारी शिकायतें करता फिरता है एक हम हैं जो उसके लबों से अपना ज़िक्र सुन मचल जाते हैं वो गैरों की महफ़िलों में गुज़ारता है आजकल शाम एक हम हैं जो उसके आने की उम्मीद से बहल जाते हैं

Continue Reading सुना है
  • Post comments:0 Comments

तुम होते तो अलग बात होती सवेरे की अदरक वाली चाय पर हमारी गुफ़्तगू कमाल होती मैं अपनी कविताएं पढ़ती तो तुम्हारी कहानियां भी साथ होती तुम होते तो अलग बात होती

Continue Reading तुम होते तो
  • Post comments:0 Comments

'चीज़' टूटी तो उसे जोड़ने की रहमत करो मैं 'इंसान' हूँ, मुझसे बस मोहब्बत करो फ़ूल टूटा तो उसकी माला बना दी माला बिखरी तो पूजाघर में सजा दी सिलाई उधड़ी तो धागा सुई चला दी किताब फ़टी तो जिल्दबन्दी करा दी सिलवटें बनीं तो इस्त्री कर मिटा दीं दरारें बनीं तो पोटीन की चादर चढ़ा दीं 'चीज़' टूटी तो उसे जोड़ने की रहमत करो मैं 'इंसान' हूँ, मुझसे बस मोहब्बत करो

Continue Reading मोहब्बत करो
  • Post comments:0 Comments

हम नज़रों के खेल को इश्क़ का नाम दे बैठे आपने तो गुज़ारी केवल एक शाम हमारे साथ हम उस शाम के सहारे पूरी ज़िन्दगी बिता बैठे

Continue Reading नज़रों का खेल