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उसकी ज़ुल्फ़ सुलझाते सुलझाते मैं ख़ुद उसमें उलझता चला जाता हूँ वो पलट कर देखती है मेरी ओर और मैं उन अदाओं से मचलता चला जाता हूँ

Continue Readingउसकी बातें
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सुनता हूँ जो गीत रातों में मैं धुन सभी उसे भी सुनाना चाहूँ जागा करती है जो तन्हा रातों में उसे अपनी बाहों में सुलाना चाहूँ

Continue Readingचाहूँ
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चाँद और वो एक दूजे से इतने भी अलग नहीं हर रात चाँद बदलता है आकार भीतर बदलती रहती है वो भी वो सूर्य की ओट में दमकता है खिलती है तेरी रोशनी में वो भी

Continue Readingचाँद और वो
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तुम होते तो अलग बात होती सवेरे की अदरक वाली चाय पर हमारी गुफ़्तगू कमाल होती मैं अपनी कविताएं पढ़ती तो तुम्हारी कहानियां भी साथ होती तुम होते तो अलग बात होती

Continue Readingतुम होते तो