ताज़्ज़ुब की बात है न

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ताज़्ज़ुब की बात है न

जो कहा करते थे कि तुम जैसे हो
तुमसे वैसे ही मोहब्बत करेंगे

तुम्हारे हर गहरे घाव पर
अपने होठों से मरहम करेंगे

हर दुखती रग को
साहस से मज़बूत करेंगे

तुम्हारे हर आंसू की बूंद को
शिद्दत से पिया करेंगे

तुम्हारी हर बुरी याद को
अच्छी में तब्दील करेंगे

तुम्हारे कमज़ोर वक़्त में
सहारा बना करेंगे

ताज़्ज़ुब की बात है न

जो कहा करते थे कि तुम जैसे हो
तुमसे वैसे ही मोहब्बत करेंगे
बस हमें दिल में इज़ाज़त तो दो
हम अपनी ज़िन्दगी तुम्हारे नाम कर देंगे

ताज़्ज़ुब की बात है न

जब मोहब्बत की बात करने वाले ही
तुमसे आज़ादी मांगने लगें

ताज़्ज़ुब की बात है न

जब मरहम करने वाले हाथ ही
ज़ख्म देने लगें

ताज़्ज़ुब की बात है न

जब मज़बूत करने वाले ही
दुखती रग पर कदम रखने लगें

ताज़्ज़ुब की बात है न

जब तुम्हारे अश्कों को पीने वाले होंठ ही
कड़वाहट उगलने लगें

ताज़्जुब की बात है न

जब अच्छी यादों की बात करने वाले ही
बुरी यादों की सौगात देने लगें

ताज़्ज़ुब की बात है न

जब सहारा देने वाले ही
मुँह फेरने लगें

ताज़्ज़ुब की बात है न

जो कहा करते थे कि तुम जैसे हो
तुमसे वैसे ही मोहब्बत करेंगे

उनसे जैसे ही मोहब्बत हुई
वे कुछ यूँ ही बदलने लगेंगे

ताज़्ज़ुब की बात है न।

 © अपूर्वा बोरा

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