तलाश

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किसी रोज़
खुद की तलाश में
तेरे दर पर दस्तक दूँगी
कुछ देर ठहरूँगी
फ़िर घर की चौखट
से ही लौट जाऊँगी।

किसी रोज़
खुद की तलाश में
तेरे शहर से गुज़रूँगी
कुछ देर ठहरूँगी
फ़िर तेरा स्टेशन आते
ही आगे बढ़ जाऊँगी।

किसी रोज़
खुद की तलाश में
तुझसे सवाल पूछुंगी
कुछ देर ठहरूँगी
फ़िर जवाब भीतर पाते
ही खाली हाथ चले जाऊँगी।

किसी रोज़
खुद की तलाश में
तुझसे रास्ते में मिलूँगी
कुछ देर ठहरूँगी
फ़िर अतीत का बोझ अतीत
में ही छोड़ जाऊँगी।

किसी रोज़
खुद की तलाश में
तेरे दर पर आऊँगी
कुछ देर ठहरूँगी
फ़िर हमेशा के लिए
वापस लौट जाऊँगी।

© अपूर्वा बोरा​

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