ठहरो तो सही

अच्छा ठहरो तो सही
प्रकृति के इस प्रकोप से
तनिक डरो तो सही

अच्छा ठहरो तो सही
धुँए में सांस लेने से
तनिक डरो तो सही

अच्छा ठहरो तो सही
बिन मौसम की बरसात से
तनिक डरो तो सही

अच्छा ठहरो तो सही
तपती हुई धरा से
तनिक डरो तो सही

अच्छा ठहरो तो सही
सूखते हुए जलाशय से
तनिक डरो तो सही

अच्छा ठहरो तो सही
पिघलते हुए ग्लेशियर से
तनिक डरो तो सही

अच्छा ठहरो तो सही
बढ़ती हुई तादाद से
तनिक डरो तो सही

अच्छा ठहरो तो सही
कल हो न हो की सोच से
तनिक डरो तो सही

अच्छा ठहरो तो सही
आज के ऊपर मंडराते खतरे से
तनिक डरो तो सही

अच्छा ठहरो तो सही।

 © अपूर्वा बोरा

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